आज कल कुछ होने लगा है.. पता नही क्या लेकिन जो भी है अच्छा है.....
मुझे लगता है कि शायद मुझे प्यार हो गया है लेकिन ये कैसा प्यार है जो अब हुआ... कहने का मतलब है.......
यार..... स्कूल से लेकर कॉलेज तक कॉलेज से लेकर प्रोफेशनल
institute तक प्यार क्यों नही हुआ.......अब हुआ जब हम एक ऑफिस में इतने व्यस्त रहते है कि हम किसी को समय ही न दे पाए.....
ख़ैर ये दिल का मामला है ........ ज़रा सोचना तो पड़ेगा... लेकिन क्या आप किसी को जाने बिना उससे प्यार कर सकते हैं
मैने प्यार किया एक तरफा ही सही... मैं उसकी महोब्बत में इस कदर खो गया कि मेरे दोस्त कहने लगे कि "अब्दुल तू बदल गया है" लेकिन मैं ऐसा महसूस नही करता था.. मेरे लिए सब एक बराबर थे..फिर भी मेरे दोस्तों को कुछ न कुछ महसूस ज़रूर हुआ होगा....
खैर मैं सिर्फ इतना जानता हुं कि मै उससे महोब्बत करता हुं और उससे शादी करना चाहता हूं.... सब मेरे साथ हैं सबको हमारी जोड़ी अच्छी लगती है....मैं बहुत खुश था कि चलो खुदा ने हमारे लिए किसी को तो बनाया है..... लेकिन....अचानक....
कुछ ऐसा हुआ कि मानो ....लफ्ज़ नही है कैसे कहुं.... बस इतना कह सकता हूं कि वह किसी और से महोब्बत करतीं हैं ....... और वह बहुत खुश हैं..
मै तो बस ये कह सकतां हूं....
"उनके चेहरे पर किस कदर नूर है कि
उनकी याद में रोना भी मंज़ूर है
बेबफ़ा भी नही कह सकता उसे यारो
महोब्बत तो हमने की है वह तो बेकसूर है"