Thursday, January 1, 2009

कैसा जश्न....

नया साल एक बार फिर दस्तक दे रहा है...
सब जश्न मनाने की तैयारी कर रहें हैं....
मैने भी सोचा कि जश्न तो होना चाहिए......लेकिन ......
एक ऐसा दृश्य सामने आ जाता है...जिस्से मन में कुछ प्रशन उठतें हैं....साल 2008 जा रहा है... तो खुशी कैसी वो जाते जाते हमसे बहुत कुछ ले जा रहा है....
कैसे बयां करू साल 2008 में हम लोगों ने बहुत कुछ देखा है......मालेगांव धमाकों से जयपुर धमाके.....अहमदाबाद से दिल्ली और मुम्बई तक के आतंक का सफर हमने बाखूबी देखा है ।

ऐसे में ....
ऑसुओ मे जो बह जाए वो क्या जिंदगी,
लम्हो मे जो कट जाए वो क्या जिंदगी,
जिंदगी का फलसफां हि कुछ और है,
जो अगर समझ आए वो क्या जिंदगी ।

क्या वाकई 2009 के आने की ख़ुशी में हमें सब भूल जाना chaahiy ??????

1 comment:

मधुकर राजपूत said...

दर्द सालता है, भूलता नहीं। लिखिये, प्रयास करिए। लोखनी मांजने का वक्त है। ब्लॉग जगत में स्वागत है।