Tuesday, January 27, 2009

ऑफिस का प्यार....

आज कल कुछ होने लगा है.. पता नही क्या लेकिन जो भी है अच्छा है.....
मुझे लगता है कि शायद मुझे प्यार हो गया है लेकिन ये कैसा प्यार है जो अब हुआ... कहने का मतलब है.......

यार..... स्कूल से लेकर कॉलेज तक कॉलेज से लेकर प्रोफेशनल institute तक प्यार क्यों नही हुआ.......अब हुआ जब हम एक ऑफिस में इतने व्यस्त रहते है कि हम किसी को समय ही न दे पाए.....

ख़ैर ये दिल का मामला है ........ ज़रा सोचना तो पड़ेगा... लेकिन क्या आप किसी को जाने बिना उससे प्यार कर सकते हैं
मैने प्यार किया एक तरफा ही सही... मैं उसकी महोब्बत में इस कदर खो गया कि मेरे दोस्त कहने लगे कि "अब्दुल तू बदल गया है" लेकिन मैं ऐसा महसूस नही करता था.. मेरे लिए सब एक बराबर थे..फिर भी मेरे दोस्तों को कुछ न कुछ महसूस ज़रूर हुआ होगा....
खैर मैं सिर्फ इतना जानता हुं कि मै उससे महोब्बत करता हुं और उससे शादी करना चाहता हूं.... सब मेरे साथ हैं सबको हमारी जोड़ी अच्छी लगती है....मैं बहुत खुश था कि चलो खुदा ने हमारे लिए किसी को तो बनाया है..... लेकिन....अचानक....

कुछ ऐसा हुआ कि मानो ....लफ्ज़ नही है कैसे कहुं.... बस इतना कह सकता हूं कि वह किसी और से महोब्बत करतीं हैं ....... और वह बहुत खुश हैं..


मै तो बस ये कह सकतां हूं....
"उनके चेहरे पर किस कदर नूर है कि
उनकी याद में रोना भी मंज़ूर है
बेबफ़ा भी नही कह सकता उसे यारो
महोब्बत तो हमने की है वह तो बेकसूर है"

Saturday, January 10, 2009

ऑफिस का भूत.....

आज मै ऑफिस में नाईट शिफ्ट में काम कर रहा था। सब अपने अपने काम में लगे थे कि अचानक ऑफिस का माहोल बदल गया। ऐसा महसूस हुआ कि भूतों का भी अस्तित्व है शायद.......
एक चीख की आवाज़ ने सारे लोगों को अपनी सीट से उठने पर मजबूर कर दिया......पता नही क्यों ??????
लेकिन हर चेहरा ऐसा था मानो कि सबने भूत महाशय के साक्षात दर्शन किये हो और लोगो ने अपनी तलाश शुरू की...... कोई कहीं तो कोई कहीं सब भूत महाशय को खोज रहे थे..... खोज इतनी लंबी थी कि 2 से 3 घंटे काम बंद रहा ऐसा लग रहा था कि सब पिक्निक पर आए है कोई किसी के साथ कहीं जा रहा है तो कोई कहीं.. पता नही कि भूत महाशय ने हमें 2 से 3 घंटे का ब्रेक क्यों दिया..... लगता है कि भूत महाशय भी हमारे काम के प्रेशर से परेशान थे खैर जो भी हो इस घटना के बाद से भूत महाशय के दर्शन लोग रोज़ करना चाहेंगे............

आपको क्या लगता है????

Thursday, January 1, 2009

कैसा जश्न....

नया साल एक बार फिर दस्तक दे रहा है...
सब जश्न मनाने की तैयारी कर रहें हैं....
मैने भी सोचा कि जश्न तो होना चाहिए......लेकिन ......
एक ऐसा दृश्य सामने आ जाता है...जिस्से मन में कुछ प्रशन उठतें हैं....साल 2008 जा रहा है... तो खुशी कैसी वो जाते जाते हमसे बहुत कुछ ले जा रहा है....
कैसे बयां करू साल 2008 में हम लोगों ने बहुत कुछ देखा है......मालेगांव धमाकों से जयपुर धमाके.....अहमदाबाद से दिल्ली और मुम्बई तक के आतंक का सफर हमने बाखूबी देखा है ।

ऐसे में ....
ऑसुओ मे जो बह जाए वो क्या जिंदगी,
लम्हो मे जो कट जाए वो क्या जिंदगी,
जिंदगी का फलसफां हि कुछ और है,
जो अगर समझ आए वो क्या जिंदगी ।

क्या वाकई 2009 के आने की ख़ुशी में हमें सब भूल जाना chaahiy ??????