Saturday, June 21, 2008
ख्वाहिशों की तलाश में..........
कभी-कभी इन्सान जो सोचता है वो अक्सर होता ही नहीं है। हर किसी के कुछ सपने होते हैं, कुछ ख्वाहिशें होती हैं। जिसे पूरा करने की चाह में अक्सर हम ज़िंदगी को इतने नजदीक से देखते हैं कि कभी-कभी हमें अपनी ज़िंदगी से नफरत सी होने लगती है। यही वो समय होता है जो ज़िंदगी बिगाड़ता है और बनाता भी है और ऐसा ही कुछ मेरे साथ भी हुआ। क्या जानना चाहेंगे आप ?.............
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