Sunday, February 7, 2010

Sharukh's war

NOw Sharukh doing right job against shiv sena :)

Saturday, June 27, 2009

प्यार या आकर्षण ......?


एक और हसीं चेहरा ......

वो मनमोहक मुस्कान .....

जिसपे हम क्या कोई भी फ़िदा हो जाये....

यार बनाने वाले ने क्या खूब बनाया है उसे .............

Monday, February 16, 2009

एक और बेरोज़गार.....


क्या है खुदा का निज़ाम ....
इसका जवाब मिलना मुश्किल है......
जब -जब किसी पर मुसीबत आती है तब -तब वह खुदा को याद करता है
इंसानी फितरत है दुख में खुदा को याद करना ... आज कल ये ज़्यादा चल रहा है क्यों ? इसका जवाब आपको रोज़ के अख़बार में या समाचार चैनलों पर ज़रूर मिल जाएगा..
आज दुनिया आर्थिक मंदी को झेल रही है और दुनिया वाले बेरोज़गारी को.....
न जोने कितने ऐसे परिवार है जहा कोई न कोई बेरोज़गार है....
कोई अपने गलत फैसले को कोस रहा है तो कोई कंपनी को ......
कोई अपने आप को कोस रहा है तो कोई खुदा से नाराज़ है .....
आखिर इस मंदी में खुदा भी क्या कर सकता है........
वो खुद यह सोच रहा है कि आखिर उसने दुनिया क्यों बनाई....?
खैर बेरोज़गारी के इस दौर में खुदा की इबादत करने वालों की मानों भीड़ सी लग गई है.. और किसी के पास कोई चारा भी तो नही...
बेरोज़गारी पर क्या लिखूं ....यह एक कड़वी सच्चाई है....
बेरोज़गारी ........
बेरोज़गारी ........
बेरोज़गारी ........
आखिर कब आएगी नौकरी की बहार.......?
इस प्रशन का उत्तर जल्द खोजना होगा......... वरना अंजाम ......?

Wednesday, February 4, 2009

मौसम महोब्बत का.....


मौसम महोब्बत का ..........
क्या बात है जिधर देखो वहीं महोब्बत की झलक कोई किसी के लिए कुछ खरीद रहा है तो कोई कुछ..... हर कोई अपने प्रिय को खुश करने का प्रयास कर रहा है... महोब्बत चीज ही ऐसी है लेकिन मै आज बहुत उदास हूं....... पता नही क्यों ?
खैर मेरा दोस्त राजू
राजू मेरा बच्पन का दोस्त है... मेरा खास दोस्त.. आज मेरे पास आया उसके हाथ में एक गुलाब का फूल था... मेरे मन में एक प्रशन उठा .. मैने तपाक से पूछा... क्या बात है ..... आज किस और जा रहा है मेरा दोस्त...?

उसका उत्तर कॉमन था.... कि आज वेलेंटाइन डे है, मै पूजा को ये गुलाब दूंगा.... मैने कहा यार पूजा तो तेरी गर्लफ्रैंड है ... तो क्या हुआ... हम आज अलग अंदाज़ में मिलेंगे.......
और वो चला गया.......
मैने सोचा... क्या किस्मत पाई है यार मस्त रहता है.....

खैर शाम होने को है राजू का कोई पता नही है वैल आ जाएगा..... अचानक राजू आता है लेकिन उसकी हालत ऐसी है जैसे मानो कि उसको किसी ने बुरी तरह से बजाया हो मैने उससे पूछा ...
क्या हुआ..?
वह सहमा हुआ था... थोड़ी देर बाद जवाब दिया...
उसने कहा यार मैने पूजा के साथ दिन की शुरूआत की यार क्या मज़ा आ रहा था..हम यहां गए..वहां गए.... मैने कहां यार हुआ क्या ..?
वह बोला कि मै पूजा के साथ मूवी देखने चला गया वहा अचानक किसी संघ के कुछ युवक आ धमके जिनके हाथों में कुछ हथियार थे और उन युवकों ने गालीगलोज शुरू कर दिया..

उसने कहा उन लोगों ने हमे पकड़ लिया और कुछ कहे बिना मार पीट शुरू कर दी...
हमने कुछ कहने की कोशिश भी की लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं थे .....
उन युवकों ने हमें सबके सामने मारना शुरू कर दिया और हमनें बिना किसी अपराध के ये सब सहा हद तो तब हो गई जब उन युवाओं ने हमें मुर्गा बना दिया विरोध की कोशिश भी की लेकिन सब बेकार......
लड़कीयों को तो थोड़ी देर बाद छोड़ दिया गया लेकिन हमें पास के एक पुलिस स्टेशन ले जाकर हमें बिना किसी अपराध के बंद कर दिया गया ......
पुलिस ने हमसे बुरा व्यवहार किया और हम पर डंडे बरसने लगे.....
थोड़ी देर बाद जब वह कुछ सुनने के लिए तैय्यार हुए तो मुंह खोल दिया और मांग डाले रूपये.... यार हमें जान तो बचानी ही थी तो दे दिया रूपया....
यार मेरा क्या कसूर था...?
राजू के इस सवाल से मै सोच में पड़ गया ...... कि आज हम विकास की गति में दौड़ रहें है.. और विकसित होने की चाह रखतें है......
लेकिन ऐसा करके हम क्या विकसित हो पाएंगे...?
खैर मै तो बस यह सोचता हूं कि अगर कुछ दिन ऐसा और चला तो हम महोब्बत के नाम से दूर भागा करेंगे....

अर्ज़ है........
इश्क में ये अंजाम पाया है,
हाथ पैर टूटे मुंह से खून आया है,
अस्पताल पंहुचे तो नर्सों ने यह फरमाया है कि
वेलेंटाइन डे का मारा एक और ग्राहक आया है।





Tuesday, January 27, 2009

ऑफिस का प्यार....

आज कल कुछ होने लगा है.. पता नही क्या लेकिन जो भी है अच्छा है.....
मुझे लगता है कि शायद मुझे प्यार हो गया है लेकिन ये कैसा प्यार है जो अब हुआ... कहने का मतलब है.......

यार..... स्कूल से लेकर कॉलेज तक कॉलेज से लेकर प्रोफेशनल institute तक प्यार क्यों नही हुआ.......अब हुआ जब हम एक ऑफिस में इतने व्यस्त रहते है कि हम किसी को समय ही न दे पाए.....

ख़ैर ये दिल का मामला है ........ ज़रा सोचना तो पड़ेगा... लेकिन क्या आप किसी को जाने बिना उससे प्यार कर सकते हैं
मैने प्यार किया एक तरफा ही सही... मैं उसकी महोब्बत में इस कदर खो गया कि मेरे दोस्त कहने लगे कि "अब्दुल तू बदल गया है" लेकिन मैं ऐसा महसूस नही करता था.. मेरे लिए सब एक बराबर थे..फिर भी मेरे दोस्तों को कुछ न कुछ महसूस ज़रूर हुआ होगा....
खैर मैं सिर्फ इतना जानता हुं कि मै उससे महोब्बत करता हुं और उससे शादी करना चाहता हूं.... सब मेरे साथ हैं सबको हमारी जोड़ी अच्छी लगती है....मैं बहुत खुश था कि चलो खुदा ने हमारे लिए किसी को तो बनाया है..... लेकिन....अचानक....

कुछ ऐसा हुआ कि मानो ....लफ्ज़ नही है कैसे कहुं.... बस इतना कह सकता हूं कि वह किसी और से महोब्बत करतीं हैं ....... और वह बहुत खुश हैं..


मै तो बस ये कह सकतां हूं....
"उनके चेहरे पर किस कदर नूर है कि
उनकी याद में रोना भी मंज़ूर है
बेबफ़ा भी नही कह सकता उसे यारो
महोब्बत तो हमने की है वह तो बेकसूर है"

Saturday, January 10, 2009

ऑफिस का भूत.....

आज मै ऑफिस में नाईट शिफ्ट में काम कर रहा था। सब अपने अपने काम में लगे थे कि अचानक ऑफिस का माहोल बदल गया। ऐसा महसूस हुआ कि भूतों का भी अस्तित्व है शायद.......
एक चीख की आवाज़ ने सारे लोगों को अपनी सीट से उठने पर मजबूर कर दिया......पता नही क्यों ??????
लेकिन हर चेहरा ऐसा था मानो कि सबने भूत महाशय के साक्षात दर्शन किये हो और लोगो ने अपनी तलाश शुरू की...... कोई कहीं तो कोई कहीं सब भूत महाशय को खोज रहे थे..... खोज इतनी लंबी थी कि 2 से 3 घंटे काम बंद रहा ऐसा लग रहा था कि सब पिक्निक पर आए है कोई किसी के साथ कहीं जा रहा है तो कोई कहीं.. पता नही कि भूत महाशय ने हमें 2 से 3 घंटे का ब्रेक क्यों दिया..... लगता है कि भूत महाशय भी हमारे काम के प्रेशर से परेशान थे खैर जो भी हो इस घटना के बाद से भूत महाशय के दर्शन लोग रोज़ करना चाहेंगे............

आपको क्या लगता है????

Thursday, January 1, 2009

कैसा जश्न....

नया साल एक बार फिर दस्तक दे रहा है...
सब जश्न मनाने की तैयारी कर रहें हैं....
मैने भी सोचा कि जश्न तो होना चाहिए......लेकिन ......
एक ऐसा दृश्य सामने आ जाता है...जिस्से मन में कुछ प्रशन उठतें हैं....साल 2008 जा रहा है... तो खुशी कैसी वो जाते जाते हमसे बहुत कुछ ले जा रहा है....
कैसे बयां करू साल 2008 में हम लोगों ने बहुत कुछ देखा है......मालेगांव धमाकों से जयपुर धमाके.....अहमदाबाद से दिल्ली और मुम्बई तक के आतंक का सफर हमने बाखूबी देखा है ।

ऐसे में ....
ऑसुओ मे जो बह जाए वो क्या जिंदगी,
लम्हो मे जो कट जाए वो क्या जिंदगी,
जिंदगी का फलसफां हि कुछ और है,
जो अगर समझ आए वो क्या जिंदगी ।

क्या वाकई 2009 के आने की ख़ुशी में हमें सब भूल जाना chaahiy ??????