Monday, February 16, 2009

एक और बेरोज़गार.....


क्या है खुदा का निज़ाम ....
इसका जवाब मिलना मुश्किल है......
जब -जब किसी पर मुसीबत आती है तब -तब वह खुदा को याद करता है
इंसानी फितरत है दुख में खुदा को याद करना ... आज कल ये ज़्यादा चल रहा है क्यों ? इसका जवाब आपको रोज़ के अख़बार में या समाचार चैनलों पर ज़रूर मिल जाएगा..
आज दुनिया आर्थिक मंदी को झेल रही है और दुनिया वाले बेरोज़गारी को.....
न जोने कितने ऐसे परिवार है जहा कोई न कोई बेरोज़गार है....
कोई अपने गलत फैसले को कोस रहा है तो कोई कंपनी को ......
कोई अपने आप को कोस रहा है तो कोई खुदा से नाराज़ है .....
आखिर इस मंदी में खुदा भी क्या कर सकता है........
वो खुद यह सोच रहा है कि आखिर उसने दुनिया क्यों बनाई....?
खैर बेरोज़गारी के इस दौर में खुदा की इबादत करने वालों की मानों भीड़ सी लग गई है.. और किसी के पास कोई चारा भी तो नही...
बेरोज़गारी पर क्या लिखूं ....यह एक कड़वी सच्चाई है....
बेरोज़गारी ........
बेरोज़गारी ........
बेरोज़गारी ........
आखिर कब आएगी नौकरी की बहार.......?
इस प्रशन का उत्तर जल्द खोजना होगा......... वरना अंजाम ......?

Wednesday, February 4, 2009

मौसम महोब्बत का.....


मौसम महोब्बत का ..........
क्या बात है जिधर देखो वहीं महोब्बत की झलक कोई किसी के लिए कुछ खरीद रहा है तो कोई कुछ..... हर कोई अपने प्रिय को खुश करने का प्रयास कर रहा है... महोब्बत चीज ही ऐसी है लेकिन मै आज बहुत उदास हूं....... पता नही क्यों ?
खैर मेरा दोस्त राजू
राजू मेरा बच्पन का दोस्त है... मेरा खास दोस्त.. आज मेरे पास आया उसके हाथ में एक गुलाब का फूल था... मेरे मन में एक प्रशन उठा .. मैने तपाक से पूछा... क्या बात है ..... आज किस और जा रहा है मेरा दोस्त...?

उसका उत्तर कॉमन था.... कि आज वेलेंटाइन डे है, मै पूजा को ये गुलाब दूंगा.... मैने कहा यार पूजा तो तेरी गर्लफ्रैंड है ... तो क्या हुआ... हम आज अलग अंदाज़ में मिलेंगे.......
और वो चला गया.......
मैने सोचा... क्या किस्मत पाई है यार मस्त रहता है.....

खैर शाम होने को है राजू का कोई पता नही है वैल आ जाएगा..... अचानक राजू आता है लेकिन उसकी हालत ऐसी है जैसे मानो कि उसको किसी ने बुरी तरह से बजाया हो मैने उससे पूछा ...
क्या हुआ..?
वह सहमा हुआ था... थोड़ी देर बाद जवाब दिया...
उसने कहा यार मैने पूजा के साथ दिन की शुरूआत की यार क्या मज़ा आ रहा था..हम यहां गए..वहां गए.... मैने कहां यार हुआ क्या ..?
वह बोला कि मै पूजा के साथ मूवी देखने चला गया वहा अचानक किसी संघ के कुछ युवक आ धमके जिनके हाथों में कुछ हथियार थे और उन युवकों ने गालीगलोज शुरू कर दिया..

उसने कहा उन लोगों ने हमे पकड़ लिया और कुछ कहे बिना मार पीट शुरू कर दी...
हमने कुछ कहने की कोशिश भी की लेकिन वह सुनने को तैयार नहीं थे .....
उन युवकों ने हमें सबके सामने मारना शुरू कर दिया और हमनें बिना किसी अपराध के ये सब सहा हद तो तब हो गई जब उन युवाओं ने हमें मुर्गा बना दिया विरोध की कोशिश भी की लेकिन सब बेकार......
लड़कीयों को तो थोड़ी देर बाद छोड़ दिया गया लेकिन हमें पास के एक पुलिस स्टेशन ले जाकर हमें बिना किसी अपराध के बंद कर दिया गया ......
पुलिस ने हमसे बुरा व्यवहार किया और हम पर डंडे बरसने लगे.....
थोड़ी देर बाद जब वह कुछ सुनने के लिए तैय्यार हुए तो मुंह खोल दिया और मांग डाले रूपये.... यार हमें जान तो बचानी ही थी तो दे दिया रूपया....
यार मेरा क्या कसूर था...?
राजू के इस सवाल से मै सोच में पड़ गया ...... कि आज हम विकास की गति में दौड़ रहें है.. और विकसित होने की चाह रखतें है......
लेकिन ऐसा करके हम क्या विकसित हो पाएंगे...?
खैर मै तो बस यह सोचता हूं कि अगर कुछ दिन ऐसा और चला तो हम महोब्बत के नाम से दूर भागा करेंगे....

अर्ज़ है........
इश्क में ये अंजाम पाया है,
हाथ पैर टूटे मुंह से खून आया है,
अस्पताल पंहुचे तो नर्सों ने यह फरमाया है कि
वेलेंटाइन डे का मारा एक और ग्राहक आया है।